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रुड़की(संदीप तोमर) दो दिन पूर्व उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और भाजपा के फायर ब्रांड नेता योगी आदित्यनाथ की रुड़की के नेहरू स्टेडियम में हुई जनसभा में सैनी समाज के लोगों की बहुत कम उपस्थिति ने भाजपा रणनीतिकारों के माथे पर चिंता की लकीरें डाल दी थी। बसपा से डा.अंतरिक्ष सैनी प्रत्याशी होने और सैनी बिरादरी का कथित झुकाव उनकी ओर होने की सूचनाओं के चलते योगी की इस जनसभा के बाद भाजपा नेताओं की नजर आज दिल्ली रोड पर सम्पन्न हुई बसपा सुप्रीमो मायावती की इस रैली पर लग गयी थी। इधर कांग्रेस की निगाह भी इस रैली पर लगी थी। दोनों पार्टी इस रैली में मुस्लिम और सैनी समाज के लोगों की संख्या को देखकर अपनी आगामी चुनावी रणनीति तैयार करने की योजना बनाये हुए थे। अब रैली में मुस्लिम वर्ग की उपस्थिति की बात की जाए तो इस वर्ग की संख्या बहुत कम रही,यह कांग्रेस के लिए खुशी की बात कही जा सकती है। किन्तु भाजपा के परम्परागत मतदाता समझे जाने वाले सैनी समाज के लोगों की इस रैली में बहुत कम संख्या कांग्रेसी खेमे को अच्छी न लगे,क्योंकि जितना भाजपा के परम्परागत सैनी मतदाता का झुकाव बसपा की ओर होगा,उतना कांग्रेस को फायदा दिखेगा। सैनी समाज की कम उपस्थिति फिलहाल भाजपा के लिए राहत वाली बात कही जा सकती है। आज की इस रैली को देखते हुए भाजपा प्रत्याशी डा.निशंक ने अपने अधिकांश कार्यक्रम सैनी बाहुल्य गांवों में पहले से ही तय कर दिए थे। अब भाजपा के लोगों का मानना है कि डा.निशंक और अन्य भाजपा नेताओं के प्रयासों से सैनी समाज बसपा की ओर जाने से रुक गया है। अब यह मतदान तक रुका रहेगा?यह देखने वाली बात होगी। खैर इसके उलट बसपा से जुड़े नेताओं का दावा है कि सैनी समाज एक रणनीति के तहत ऐसा कर रहा है। वह सामने नही आ रहा है किंतु वोटिंग में बसपा के ही साथ रहेगा। ऐसा है तो भी भाजपा को सचेत रहने की जरूरत है। यह तो हुई भाजपा और कांग्रेस की बात,बसपा की बात करें तो उसके लिए प्रत्याशी सैनी बिरादरी का होने के चलते रैली में सैनी बिरादरी के लोगों की कुछ सौ की संख्या और करेला नीम चढ़ा की तर्ज पर मुस्लिम की भी बहुत कम उपस्थिति उसके लिए चिंता का विषय हो सकते हैं। हालांकि जिस तरह सैनी बिरादरी को लेकर बसपा नेताओं का तर्क है,उसी तरह मुस्लिम मतदाताओं को लेकर भी पार्टी के नेताओं का दावा है कि यह वर्ग भी भाजपा का खेल बिगाड़ने को अपने पत्ते सामने आकर नही खोल रहा है,अलबत्ता मतदान के समय वह कथित रूप से बसपा के ही साथ रहेगा। खैर बसपा के लिए बड़ी राहत की बात यह कही जा सकती है कि उसका परम्परागत मतदाता समझा जाने वाला दलित वर्ग बहुतायत में उसके साथ ही दिख रहा है,आज मुख्यत इसी दलित वर्ग के बूते 8 से 10 हजार की भीड़ वाली यह रैली सम्पन्न हो सकी। बहरहाल उक्त पूरी स्थिति को अपने- अपने ढंग से देख रहे सभी पार्टियों के नेताओं के दावों में कितना दम है?या वह किसी भ्रम के शिकार है?यह मतदान और अंत में मतगणना से ही साफ हो सकेगा।
मायावती की रैली में बहुत कम नजर आए सैनी,निराशाजनक ही रही मुस्लिम वर्ग की भी मौजूदगी,अब अपने-अपने नजरिये से पूरी स्थिति को देख रहे दलीय नेता
