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रुड़की(संदीप तोमर)। लोकतांत्रिक जनमोर्चा के संयोजक और मेयर चुनाव में निर्दलीय उतरे उक्रांद व पूर्व बसपा विधायक मौ.शहजाद समर्थित प्रत्याशी सुभाष सैनी ने जबसे नामांकन किया है तबसे उन पर निगाह लगी है कि उनकी सजातीय सैनी बिरादरी उनके साथ चलेगी या नही?विशेष रूप से गैर सैनी वर्ग और इसमें भी मुस्लिम वर्ग की निगाह सुभाष सैनी के साथ सैनी बिरादरी लगने या न लगने पर लगी थी। आज चुनाव कार्यालय उद्घाटन पर हुई जनसभा के जरिये सुभाष सैनी ने जहां न सिर्फ इस सवाल का जवाब दे दिया है,वहीं जनसभा में भाजपा के चुनाव कार्यालय उद्घाटन से भी ज्यादा भीड़ जुटाकर वह भाजपा पर आज भारी पड़ते दिखे हैं। विशेष रूप से सैनी समाज की भाजपा के कार्यक्रम में बहुत कम और सुभाष सैनी के कार्यक्रम में बड़ी भागीदारी ने भाजपाई खेमे में हलचल मचा दी है। यही नही जिस हिसाब से सुभाष सैनी की जनसभा में मुस्लिम वर्ग की बड़ी भागीदारी हुई,उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि कांग्रेस के रणनीतिकारों को भी अपनी रणनीति पर मंथन करना होगा।
रुड़की की निकाय राजनीति का यह सच अभी तक अटल रहा है कि किसी भी प्रत्याशी के साथ दूसरी बिरादरी के लोग तभी जुटते हैं जब उसकी खुद की बिरादरी उसके साथ जुड़ी नजर आए। पिछले कई चुनाव इसका उदाहरण है। खास तौर पर मुस्लिम वर्ग तो इस बात के पूरा तस्दीक हो जाने पर ही उस प्रत्याशी के साथ चलता है,जिसकी बिरादरी उसका समर्थन कर रही हो। यही कारण है कि सुभाष सैनी पर भी उनकी सजातीय सैनी बिरादरी को लेकर निगाह लगी थी। इसका एक कारण यह भी है कि इस क्षेत्र में सैनी बिरादरी को भाजपा के परंपरागत मतदाताओं के रूप में देखा जाता है और विधान सभा ही नही बल्कि इसी वर्ष के लोकसभा चुनाव में भी यह बिरादरी बसपा से सैनी प्रत्याशी होने के बाद भी भाजपा से अलग नही हुई। किन्तु इसके उलट एक हकीकत यह भी है कि निकाय चुनाव की तासीर थोड़ी अलग होती है। इसमें लोग दल को कोई ज्यादा महत्व नही देते। ऐसे में सुभाष सैनी और उनके समर्थक आज अपने चुनाव कार्यालय उद्घाटन की जनसभा में अधिक से अधिक सैनी समाज के लोगों को लाने पर जोर लगाए हुए थे। जिससे गैर सैनी समाज के लोगों को वास्तविक स्थिति नजर आ सके। यूं यह मेहनत अन्य बिरादरी के लोगों के लिए भी थी और गैर सैनी भी इतनी बड़ी तादाद में इस जनसभा में जुटे कि कुल भीड़ के लिहाज से भी देखें तो भी यह जनसभा आज ही भाजपा प्रत्याशी के चुनाव कार्यालय उद्घाटन की जनसभा पर भारी पडी। यही नही सुभाष सैनी की जनसभा में सैनी बिरादरी की बड़ी भागीदारी ने भाजपा की बेचैनी को बढ़ा दिया है। इधर कुछ सुभाष सैनी के व्यक्तिगत प्रभाव और दूसरे मुस्लिम वर्ग के बड़े नेताओं में गिने जाने वाले पूर्व विधायक मौ.शहजाद के प्रभाव के बूते इस जनसभा में मुस्लिम वर्ग,(महिलाएं भी शामिल थी) की भी बड़ी संख्या नजर आयी। ऐसे में अब कांग्रेस के रणनीतिकारों को भी मंथन करना होगा।
सिर्फ भीड़ ही नही सैनियों की बड़ी भागीदारी के लिहाज से भी भाजपा पर भारी पड़ी सुभाष सैनी की जनसभा,मुस्लिम वर्ग की उमड़ी भीड़ के दृष्टिगत कांग्रेस रणनीतिकारों को भी करना होगा मंथन
